राहे भी कतराएं देख इनके हालात,
यह, वह, वो, सभी दीवाना-दीवानी,
लगा रखे है कानों में दो तार,
जैसे सुन रहे हो कोई अफ़साना,
या किसी अनहोनी के समाचार,
उनकी नम व् अधखुली अखियाँ,
जैसे बयाँ कर रही गम अपार,
वो बेरंग गाल व् लाली उखड़े होंठ,
जैसे छिन रहे हो रंगीन सँसार,
कोई पलके उठाये करे दीदार,
मेरी रजनीगँधा सी मुस्कान,
और ह्रदयांशी आँखे करे पुकार,
भुलाने तेरे गम, बनाने रंगीन सँसार !
आनन्द दाधीच (बहड़) - बेंगलौर (c)







