काम ने किया हो तंग,
तो आराम देते यह बिस्तर व् पलंग !
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अगर रूठना व् टूटना हो,
साथी, हमदम संग,
तो आँसु छुपाते यह बिस्तर व् पलंग !
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अगर रिस्ते व् नाते में,
हो रही हो हुड़दंग,
तो आपबीती सुनते यह बिस्तर व् पलंग !
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अगर रोग व् दोष की,
हो जाए जिंदगी से जंग,
तो मदद दिलाते यह बिस्तर व् पलंग !
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अगर बेटे व् बहुओं की,
देखने हो सेवा के ढंग,
तो दर्शाते यह बिस्तर व् पलंग !
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हर जनम व् मरण के,
अनेको सतरंगी रंग,
बतलाते यह बिस्तर व् पलंग !
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आनंद दाधीच (बहड़) - बेंगलौर (c)

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