धर्म व् कर्म,शख्त व् नरम
हौसले व् फ़ैसले, मान व् अपमान,
सब मन में करे घमासान !
लाख मन के अरमान,
हज़ारो मन के फरमान,
मन, मगज़ को देता रुझान,
पल पल देखे नफा व् नुकसान !
मन के हिचकोलों का तान,
झेलना, होता नहीं आसान,
हर हाल लहराये मुस्कान,
यही तमाम शान का संज्ञान !
-- आनंद दाधीच (बहड़)-बेंगलुरु (c), Author of Manjusha-Hindi Poems
शौक - habit, फरमान - order, मगज़ - mind, नफा - gain, संज्ञान - hint or point of hint.

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