और गंगा-जमुना के किनारे !
याद रहते है,रात में जगमग तारे,
और अमिताभ से फ़िल्मी सितारे !
याद रहते है, रंगीन त्योहारों के नजारे,
और गर्म दाल के वड़े करारे !
याद रहते है, राजनीति में घोटाले खारे,
याद रहते है, तेरे-मेरे सपने सारे,
और आनंद से भरी मुस्कान प्यारे !
--आनन्द दाधीच (बहड़)-बेंगलुरु

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